Saturday, July 5, 2014

आपकी कुंडली में शुभ योग


कुछ ग्रह योग अशुभ माने जाते हैं जो व्यक्ति के जीवन का सुख चैन छीन लेते हैं तो कुछ ऐसे शुभ ग्रह हैं जो व्यक्ति का जीवन संवार देते हैं। ज्योतिषशास्त्र में बताये गये कुछ उत्तम योग हैं महालक्ष्मी योग, नृप योग आदि. ज्योतिष विधा ग्रह और उनके योगों के आधार पर फल का ज्ञान देता है। कुछ ग्रह योग अशुभ माने जाते हैं जो व्यक्ति के जीवन का सुख चैन छीन लेते हैं तो कुछ ऐसे शुभ ग्रह हैं जो व्यक्ति का जीवन संवार देते हैं। ज्योतिषशास्त्र में बताये गये कुछ उत्तम योग हैं महालक्ष्मी योग, नृप योग आदि. महान योगों में महालक्ष्मी योग (Mahalakshmi Yoga) धन और एश्वर्य प्रदान करने वाला योग है। यह योग कुण्डली Kundli में तब बनता है जब धन भाव यानी द्वितीय स्थान का स्वामी बृहस्पति एकादश भाव में बैठकर द्वितीय भाव पर दृष्टि डालता है। यह धनकारक योग (Dhan Yoga) माना जाता है। इसी प्रकार एक महान योग है सरस्वती योग (Saraswati Yoga) यह तब बनता है जब शुक्र बृहस्पति और बुध ग्रह एक दूसरे के साथ हों अथवा केन्द्र में बैठकर एक दूसरे से सम्बन्ध बना रहे हों। युति अथवा दृष्टि किसी प्रकार से सम्बन्ध बनने पर यह योग बनता है। यह योग जिस व्यक्ति की कुण्डली में बनता है उस पर विद्या की देवी मां सरस्वती की कृपा रहती है। सरस्वती योग वाले व्यक्ति कला, संगीत, लेखन, एवं विद्या से सम्बन्धित किसी भी क्षेत्र में काफी नाम और धन कमाते हैं। नृप योग (Nrup Yoga) नाम से ही ज्ञात होता है कि यह जिस व्यक्ति की कुण्डली Kundli में बनता है वह राजा के समान जीवन जीता है। इस योग का निर्माण तब होता है जब व्यक्ति की जन्म कुण्डली में तीन या उससे अधिक ग्रह उच्च स्थिति में रहते हैं। अमला योग (Amla Yoga) भी शुभ और महान योगों में से माना जाता है। यह योग तब बनता है जब जन्म पत्रिका में चन्द्रमा से दशम स्थान पर कोई शुभ ग्रह स्थित होता है। इस योग के साथ जन्म लेने वाला व्यक्ति अपने जीवन में धन, यश और कीर्ति हासिल करता है। गजकेशरी योग (Gajkesari Yoga) को असाधारण योग की श्रेणी में रखा गया है। यह योग जिस व्यक्ति की कुण्डली में उपस्थित होता है उस व्यक्ति को जीवन में कभी भी अभाव नहीं खटकता है। इस योग के साथ जन्म लेने वाले व्यक्ति की ओर धन, यश, कीर्ति स्वत: खींची चली आती है। जब कुण्डली में गुरू और चन्द्र पूर्ण कारक प्रभाव के साथ होते हैं तब यह योग बनता है। लग्न स्थान में कर्क, धनु, मीन, मेष या वृश्चिक हो तब यह कारक प्रभाव के साथ माना जाता है। हलांकि अकारक होने पर भी फलदायी माना जाता परंतु यह मध्यम दर्जे का होता है। चन्द्रमा से केन्द्र स्थान में 1, 4, 7, 10 बृहस्पति होने से गजकेशरी योग बनता है। इसके अलावा अगर चन्द्रमा के साथ बृहस्पति हो तब भी यह योग बनता है। पारिजात योग (Parijat Yoga) भी उत्तम योग माना जाता है लेकिन इस योग की विशेषता यह है कि यह जिस व्यक्ति की कुण्डली में होता है वह जीवन में कामयाबी और सफलता के शिखर पर पहुंचता है परंतु रफ्तार धीमी रहती है यही कारण है कि मध्य आयु के पश्चात इसका प्रभाव दिखाई देता है। पारिजात योग का निर्माण तब होता है जबकि जन्म पत्रिका में लग्नेश जिस राशि में होता है उस राशि का स्वामी कुण्डली में उच्च स्थान पर हो या अपने घर में हो। छत्र योग (Chhatra Yoga) जिस व्यक्ति की जन्म पत्रिका Kundli में होता है वह व्यक्ति जीवन मे निरन्तर प्रगति करता हुए उच्च पद प्राप्त करता है। इस भगवान की छत्र छाया वाला योग कहा जा सकता है यह योग तब बनता है तब कि कुण्डली Kundli में चतुर्थ भाव से दशम भाव तक सभी ग्रह मौजूद हों या फिर दशम भाव से चतुर्थ भाव तक सभी ग्रह स्थित हों। तीन भावों में दो दो ग्रह हों तथा तीन भावों में एक एक ग्रह स्थित हों तब शुभ योग बनता है जो नन्दा योग (Nanda Yoga) के नाम से जाना जाता है। यह योग जिस व्यक्ति की जन्म पत्रिका में होता है वह स्वस्थ एवं दीर्घायु होता है। इस योग से प्रभावित व्यक्ति का जीवन सुखमय रहता है। इसी प्रकार के कई अन्य योग हैं जिनकी मौजूदगी से व्यक्ति का जीवन सुखमय व आनन्दित रहता है और व्यक्ति यश एवं कीर्ति हासिल करता है। क्या आप जानते हैं कि आपकी कुण्डली में कौन कौन से शुभ योग है? अपनी कुण्डली फ्री बनाने के लिये आप होरोस्कोप एक्स्प्लोरर का 15 दिनों के लिये फ्री ट्रायल डाउनलोड http://itbix.com से करके अपनी जन्मकुंडली Kundli बना सकते हैं.होरोस्कोप एक्स्प्लोरर विश्व का सबसे अधिक बिकने वाला वैदिक ज्योतिष पर आधारित होरोस्कोप साफ्टवेयर है और इसके पूर्ण वर्जन में दस भारतीय भाषाओं में गणना एवं फलादेश उपलब्ध है. Download Free Trial of Horoscope Explorer

Wednesday, May 2, 2012

घर में सुकून के लिए वास्तु

घर में सुकून के लिए वास्तु कैसे बनाएँ घर को वास्तु के अनुकूल?
WD WD घर केवल ईंट, चूने और पत्थर की आकृति वाले घरौंदे का नाम ही नहीं है। 'घर' का अर्थ उस स्थान से है जहाँ परिवार चैन-सुकून की तलाश करता है। यदि वास्तु को ध्यान में रखकर घर का निर्माण किया जाए तो वास्तुदोषों के दुष्परिणामों से बचा जा सकता है। वर्तमान के बदलते दौर में वास्तु का महत्व दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। आजकल कई बड़े-बड़े बिल्डर व इंटीरियर डेकोरेटर भी घर बनाते व सजाते समय वास्तु का विशेष ध्यान रखते हैं। वास्तु के अनुसार ही वे कमरे की बनावट, उनमें सामानों की साज-सज्जा करते हैं। इससे घर की खूबसूरती बढ़ने के साथ-साथ सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रवाह होता है। वास्तु के अनुसार घर की सजावट करते समय निम्न बातों का ध्यान रखें :- 1) घर के प्रवेश द्वार पर स्वस्तिक अथवा 'ॐ' की आकृति लगाने से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। 2) जिस भूखंड या मकान पर मंदिर की पीठ पड़ती है, वहाँ रहने वाले दिन-ब-दिन आर्थिक व शारीरिक परेशानियों में घिरते रहते है। 3) समृद्धि की प्राप्ति के लिए नार्थ-ईस्ट दिशा में पानी का कलश अवश्य रखना चाहिए। 4) घर में ऊर्जात्मक वातावरण बनाने में सूर्य की रोशनी का विशेष महत्व होता है इसलिए घर की आंतरिक साज-सज्जा ऐसी होनी चाहिए कि सूर्य की रोशनी घर में पर्याप्त रूप में प्रवेश करे। 5) घर में कलह अथवा अशांति का वातावरण हो तो ड्राइंग रूम में फूलों का गुलदस्ता रखना श्रेष्ठ होता है। 6) अशुद्ध वस्त्रों को घर के प्रवेश द्वार के मध्य में नहीं रखना चाहिए। 7) वास्तु के अनुसार रसोईघर में देवस्थान नहीं होना चाहिए। 8) गृहस्थ के बेडरूम में भगवान के चित्र अथवा धार्मिक महत्व की वस्तुएँ नहीं लगी होना चाहिए। 9) घर में देवस्थान की दीवार से शौचालय की दीवार का संपर्क नहीं होना चाहिए। --------------------------------------------------------------------------------------------------- आजकल वास्तुशास्त्र का बोलबाला है। एक सामान्य से घर को वास्तु के इतने जटिल नियमों में बाँध दिया जाता है कि जिन्हें पढ़कर मनुष्य न केवल भ्रमित हो जाता है वरन जिनके घर पूर्णत: वास्तु अनुसार नहीं होते, वे शंकाओं के घेरे में आ जाते हैं। ऐसे मनुष्य या तो अपना घर बदलना चाहते हैं या शंकित मन से घर में निवास करते हैं। वास्तु विज्ञान का स्पष्ट अर्थ है चारों दिशाओं से मिलने वाली ऊर्जा तरंगों का संतुलन...। यदि ये तरंगें संतुलित रूप से आपको प्राप्त हो रही हैं, तो घर में स्वास्थ्य व शांति बनी रहेगी। अत: ढेरों वर्जनाओं में बँधने की बजाय दिशाओं को संत‍ुलित करें तो लाभ मिल सकता है। निम्न निर्देशों का ध्यान रखें- 1. किचन दक्षिण-पूर्व में, मास्टर बैडरूम दक्षिण-पश्चिम में, बच्चों का बैडरूम उत्तर-पश्चिम में और शौचालय आदि दक्षिण में हों। 2. पानी की निकासी उत्तर में हो, ईशान (उत्तर-पूर्व) खुला हो, दक्षिण-पश्चिम दिशा में भारी सामान हो। 3. मुख्य दरवाजा अन्य दरवाजों से बड़ा और भारी हो। 4. खि‍ड़कियाँ व दरवाजे सम संख्या में हों व पूर्व या उत्तर में खुलें। 5. तीन दरवाजे एक सीध में न हों, दरवाजे बंद करते या खोलते समय आवाज न हो। 6. पूजा के लिए ईशान कोण हो या भगवान का मुख ईशान में हो। 7. उत्तर या पूर्व में तुलसी का पौधा लगाएँ। 8. पूर्वजों के फोटो पूजाघर में न रखें, दक्षिण की दीवार पर लगाएँ। 9. शाम को घर में सांध्यदीप जलाएँ। आरती करें। 10. इष्टदेव का ध्यान और पूजन अवश्य करें। 11. भोजन के बाद जूठी थाली लेकर अधिक देर तक न बैठें। न ही जूठे बर्तन देर तक सिंक में रखें। 12. अपनी आय का एक हिस्सा इष्टदेव के नाम पर अलग रखें। घर में हमेशा समृद्धि बनी रहेगी। घर का मुख्य द्वार किस दिशा में हो, यह भी चिंता का विषय रहता है। अधिकतर दक्षिण व पश्चिम द्वार को शुभ नहीं माना जाता मगर यह तय ‍करने के लिए जन्म पत्रिका का अध्ययन जरूरी है। कुछ राशियों के लोगों के लिए ये द्वार बेहद शुभ फल देते हैं विशेषकर जिन लोगों की कुंडली में शनि-मंगल शुभ कारक ग्रह होते हैं। अत: हर दृ‍ष्टि से विचार करके वास्तु संबंधी बातें तय की जाएँ तो घर में सर्वत्र सुख-शांति का वास रह सकता है।

आज कल वास्तुशास्त्र

हर व्यक्ति अपने घर को खूबसूरत रखना चाहता है। करीने से सजा हुआ घर के व्यक्तित्व में चार चांद लगा देता है, सुंदर घर सभ्य और सुशिक्षित होने का सबूत है। आज के युवा ड्राइंग रूम और लिविंग रूम को सजाने में काफी दिलचस्पी लेने लगे हैं। घर को सजाना कोई फैशन नहीं है, बल्कि एक जरूरत है। आज कल वास्तुशास्त्र का प्रचलन खूब है और तथाकथित वास्तुशास्त्रियों की खूब चांदी है वह लोगों को बेवकूफ बना कर खूब जोरों से चांदी कूट रहे है यहाँ पर वास्तुदोष का निवारण के उपाय दिये जा रहें है इसे अपना कर के, आप अपने घर के वास्तु दोषों को दूर कर के अपने यहाँ मंगलमय वातावरण कर सकते हैंघर में वास्तुदोष होने पर, उचित यही होता है कि उसे वास्तुशास्त्र के अनुसार ठीक कर ले, यथासंभव घर के अंदर तोड़-फोड ना करे; इससे वास्तुभंग का दोष होता है। यदि हम घर की सजावट, रंग-रोगन आदि ज्योतिष एवं वास्तु के नियमों के अनुसार करें तो घर की सुंदरता तो बढ़ेगी ही, हमारे घर-आंगन में खुशियां भर जाएंगी। जैसे- - पूजा घर में फर्श के लिए हल्के पीले या सफेद रंग के संगमरमर का उपयोग श्रेष्ठ माना है। - कक्ष की दीवारों या पर्दों का रंग भी सफेद, हल्का पीला, हल्का क्रीम, हल्का आसमानी रखें। - हल्का नारंगी, केसरिया या भगवा रंग भी अच्छा लगता है। इन रंगों का इस्तेमाल करने से पूजा घर का वातावरण शुभ व कल्याणप्रद होता है। - माता लक्ष्मी को बिल्ब पत्र एवं कमल पुष्प अतिप्रिय हैं। इस पुष्प से आप अपने पूजा घर को सजा सकते हैं। यदि नीचे दिए जा रहे उपाय करें और वास्तुदोष का निवारण स्वयं करें-- (यदि फिर भी इन उपायों से कुछ लाभ ना हो तो अपने किसी विश्वासपात्र वास्तुशास्त्री से परामर्श करें.)... 1 घर में अखंड रूप से 9 बार श्री रामचरितमानस का पाठ करने से वास्तुदोष का निवारण होता है। 1 घर में 9 दिन तक अखंड कीर्तन करने से वास्तुजनित दोषों का निवारण होता है। 2 हाटकेश्वर-क्षेत्र में वास्तुपद नामक तीर्थ के दर्शन मात्र से ही वास्तुजनित दोषों का निवारण होता है। 3मुख्य द्धार के उपर सिंदूर से नो अंगुल लंबा नो अंगुल चोडा स्वास्तिक का चिन्ह बनाये और जहाँ-२ भी वास्तु दोष है वहाँ इस चिन्ह का निर्माण करें वास्तुदोष का निवारण हो जाता है। 4 रसोई घर गलत स्थान पर हो तो अग्निकोण में एक बल्ब लगा दें और सुबह-शाम अनिवार्य रूप से जलाये। ६ द्धार दोष और वेध दोष दूर करने के लिए शंख, सीप, समुद्र झाग, कौड़ी लाल कपड़े में या मोली में बांधकर दरवाजे पर लटकायें। 5 बीम के दोष को शांत करने के लिए बीम को सीलिंग टायल्स से ढंक दें। बीम के दोनों ओर बांस की बांसुरी लगायें। 6 घर के दरवाजे पर घोड़े की नाल (लोहे की) लगायें। यह अपने आप गिरी होनी चाहिए। 7 घर के सभी प्रकार के वास्तु दोष दूर करने के लिए मुख्य द्धार पर एक ओर केले का वृक्ष दूसरी ओर तुलसी का पौधा गमले में लगायें। 8 दुकान की शुभता बढ़ाने के लिए प्रवेश द्धार के दोनों ओर गणपति की मूर्ति या स्टिकर लगायें। एक गणपति की दृष्टि दुकान पर पड़ेगी, दूसरे गणपति की बाहर की ओर। 9 यदि दुकान में चोरी होती हो या अग्नि लगती हो तो भौम यंत्र की स्थापना करें। यह यंत्र पूर्वोत्तर कोण या पूर्व दिशा में, फर्श से नीचे दो फीट गहरा गङ्ढा खोदकर स्थापित किया जाता है। 10 यदि पलाट खरीदे हुये बहुत समय हो गया हो और मकान बनने का योग ना आ रहा हो तो उस प्लाट में अनार का पौधा पुष्य नक्षत्र में लगायें। 12 अगर आपका घर चारों ओर बड़े मकानों से घिरा हो तो उनके बीच बांस का लम्बा फ्लेग लगायें या कोई बहुत ऊंचा बढ़ने वाला पेड़ लगायें। 13 फैक्ट्री-कारखाने के उद्घाटन के समय चांदी का सर्प पूर्व दिशा में जमीन में स्थापित करें। 14 अपने घर के उतर के कोण में तुलसी का पौधा लगाएं 15 हल्दी को जल में घोलकर एक पान के पत्ते की सहायता से अपने सम्पूर्ण घर में छिडकाव करें. इससे घर में लक्ष्मी का वास तथा शांति भी बनी रहती है। 16 अपने घर के मन्दिर में घी का एक दीपक नियमित जलाएं तथा शंख की ध्वनि तीन बार सुबह और शाम के समय करने से नकारात्मक ऊर्जा घर से बहार निकलती है। 17 घर में सफाई हेतु रखी झाडू को रास्ते के पास नहीं रखें. यदि झाडू के बार-बार पैर का स्पर्थ होता है, तो यह धन-नाश का कारण होता है. झाडू के ऊपर कोई वजनदार वास्तु भी नहीं रखें। 18 अपने घर में दीवारों पर सुन्दर, हरियाली से युक्त और मन को प्रसन्न करने वाले चित्र लगाएं. इससे घर के मुखिया को होने वाली मानसिक परेशानियों से मुक्ति मिलती है। 19 वास्तुदोष के कारण यदि घर में किसी सदस्य को रात में नींद नहीं आती या स्वभाव चिडचिडा रहता हो, तो उसे दक्षिण दिशा की तरफ सिर करके शयन कराएं. इससे उसके स्वभाव में बदलाव होगा और अनिद्रा की स्थिति में भी सुधार होगा। 20 अपने घर के ईशान कोण को साफ़ सुथरा और खुला रखें. इससे घर में शुभत्व की वृद्धि होती है। 21 अपने घर के मन्दिर में देवी-देवताओं पर चढ़ाए गए पुष्प-हार दूसरे दिन हटा देने चाहिए और भगवान को नए पुष्प-हार अर्पित करने चाहिए। 22 घर के उत्तर-पूर्व में कभी भी कचरा इकट्ठा न होने दें और न ही इधर भारी मशीनरी रखें। 23 अपने वंश की उन्नति के लिये घर के मुख्य द्धार पर अशोक के वृक्ष दोनों तरफ लगाएं। 24 यदि आपके मकान में उत्तर दिशा में स्टोररूम है, तो उसे यहाँ से हटा दें. इस स्टोररूम को अपने घर के पश्चिम भाग या नैऋत्य कोण में स्थापित करें। 25 घर में उत्पन्न वास्तुदोष घर के मुखिया को कष्टदायक होते हैं. इसके निवारण के लिये घर के मुखिया को सातमुखी रूद्राक्ष धारण करना चाहिए। 26 यदि आपके घर का मुख्य द्धार दक्षिणमुखी है, तो यह भी मुखिया के के लिये हानिकारक होता है. इसके लिये मुख्य द्धार पर श्वेतार्क गणपति की स्थापना करनी चाहिए। 27 अपने घर के पूजा घर में देवताओं के चित्र भूलकर भी आमने-सामने नहीं रखने चाहिए इससे बड़ा दोष उत्पन्न होता है। 28 अपने घर के ईशान कोण में स्थित पूजा-घर में अपने बहुमूल्य वस्तुएँ नहीं छिपानी चाहिए। 29 पूजाकक्ष की दीवारों का रंग सफ़ेद हल्का पीला अथवा हल्का नीला होना चाहिए। 30 यदि आपके रसोई घर में रेफ्रिजरेटर नैऋत्य कोण में रखा है, तो इसे वहां से हटाकर उत्तर या पश्चिम में रखें। 31 दीपावली अथवा अन्य किसी शुभ मुहूर्त में अपने घर में पूजास्थल में वास्तुदोष नाशक कवच की स्थापना करें और नित्य इसकी पूजा करें. इस कवच को दोषयुक्त स्थान पर भी स्थापित करके आप वास्तुदोषों से सरलता से मुक्ति पा सकते हैं। 32 अपने घर में ईशान कोण अथवा ब्रह्मस्थल में स्फटिक श्रीयंत्र की शुभ मुहूर्त में स्थापना करें. यह यन्त्र लक्ष्मीप्रदायक भी होता ही है, साथ ही साथ घर में स्थित वास्तुदोषों का भी निवारण करता है। 33 प्रातःकाल के समय एक कंडे/ उपले पर थोड़ी अग्नि जलाकर उस पर थोड़ी गुग्गल रखें और ‘ॐ नारायणाय नम:’ मंत्र का उच्चारण करते हुए तीन बार घी की कुछ बूँदें डालें. अब गुग्गल से जो धुँआ उत्पन्न हो, उसे अपने घर के प्रत्येक कमरे में जाने दें. इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा ख़त्म होगी और वास्तुदोषों का नाश होगा। 34 घर में किसी भी कमरे में सूखे हुए पुष्प ना रखें . यदि छोटे गुलदस्ते में रखे हुए फूल सूख जाएं, तो नए पुष्प लगा दें और सूखे पुष्पों को निकालकर बाहर फेंक दें। 35 सुबह के समय थोड़ी देर तक निरंतर बजने वाली गायत्री मंत्र की धुन चलने दें. इसके अतिरिक्त कोई अन्य धुन भी आप बजा सकते हैं। 36 सायंकाल के समय घर के सदस्य सामूहिक आरती करें. इससे भी वास्तुदोष दूर होते हैं। 37 अगर आपके घर के पास कोई नाला या कोई नदी इस प्रकार बहती हो कि उसके बहाव की दिशा उत्तर-पूर्व को छोड़कर कोई और दिशा में है, या उसका घुमाव घडी कि विपरीत दिशा में है, तो यह वास्तु दोष है। इसका निवारण यह है कि घर के उत्तर-पूर्व कोने में पश्चिम की ओर मुख किए हुए, नृत्य करते हुए गणेश की मूर्ति रखें। 38 यदि घर में जल निकालने का स्थान / बोरिंग गलत दिशा में हो तो भवन में दक्षिण-पश्चिम की ओर मुख किए हुए पंचमुखी हनुमानजी की तस्वीर लगाएं। 39 यदि आपके भवन के ऊपर से विद्धयुत तरंगे (उच्च सवेंदी) तार गुजरती हो तो इन तारो से प्रवाहित होने वाली ऊर्जा का घर से निकलने वाली ऊर्जा से प्रतिरोध होता है। इस प्रकार के भवन में नींबुओ से भरी प्लास्टिक पाईप को फर्श से सटाकर या थोड़ा जमीन में गाड़ कर घर के इस पार से उस पार बिछा दें, नींबुओं से भरी पाईप दोनों और कम-से-कम तीन फिट बाहर निकली रहे। 40 यदि भवन में प्रवेश करते ही सामने खाली दीवार पड़े तो उस पर भावभंगिमापूर्ण गणेशजी की तस्वीर लगाएं या स्वास्तिक यंत्र का प्रयोग करके घर के ऊर्जा वृत्तों को बढ़ाया जा सकता है। पर, कुशल वास्तु कारीगर के द्वारा ही करवाना चाहिए। 41 अगर टॉयलेट घर के पूर्वी कोने में है तो टॉयलेट शीट इस प्रकार लगवाएं कि उस पर उत्तर की ओर मुख करके बैठ सकें या पश्चिम की ओर। इस प्रकार घर की नकारात्मक ऊर्जा की जगह सकारात्मक ऊर्जा ले लेगी और सारे वास्तु दोष भी दूर हो जाएंगे। फिर आप जिस कार्य में हाथ डालेंगे, आपको सफलता निश्चित रूप से मिलेगी। वास्तु के अनुसार निम्न बातों का भी ध्यान रखें ---- 1) घर के प्रवेश द्वार पर स्वस्तिक अथवा 'ॐ' की आकृति लगाने से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। 2) जिस भूखंड या मकान पर मंदिर की पीठ पड़ती है, वहाँ रहने वाले दिन-ब-दिन आर्थिक व शारीरिक परेशानियों में घिरते रहते है। 3) समृद्धि की प्राप्ति के लिए नार्थ-ईस्ट दिशा में पानी का कलश अवश्य रखना चाहिए। 4) घर में ऊर्जात्मक वातावरण बनाने में सूर्य की रोशनी का विशेष महत्व होता है इसलिए घर की आंतरिक साज-सज्जा ऐसी होनी चाहिए कि सूर्य की रोशनी घर में पर्याप्त रूप में प्रवेश करे। 5) घर में कलह अथवा अशांति का वातावरण हो तो ड्राइंग रूम में फूलों का गुलदस्ता रखना श्रेष्ठ होता है। 6) अशुद्ध वस्त्रों को घर के प्रवेश द्वार के मध्य में नहीं रखना चाहिए। 7) वास्तु के अनुसार रसोईघर में देवस्थान नहीं होना चाहिए। 8) गृहस्थ के बेडरूम में भगवान के चित्र अथवा धार्मिक महत्व की वस्तुएँ नहीं लगी होना चाहिए। 9) घर में देवस्थान की दीवार से शौचालय की दीवार का संपर्क नहीं होना चाहिए।

बिना तोड़-फोड़ कैसे मिटाएं वास्तु दोष

बिना तोड़-फोड़ कैसे मिटाएं वास्तु दोष बिना सोचे-विचारे मकान बनवाने पर उसमें कई वास्तु दोष आ जाते हैं। जिनका असर हमारे जीवन पर पड़ता है। वास्तु शास्त्रियों के अनुसार कुछ मामूली परिवर्तन कर इन वास्तु दोषों को समाप्त किया जा सकता है। यह उपाय निम्न हैं- 1- यदि आपके घर की छत पर व्यर्थ का सामान पड़ा हो तो उसे वहां से हटा दें। 2- प्लास्टर आदि उखड़ गया हो तो उसकी तत्काल मरम्मत करवा दें। 3- यदि आपकी रसोई के गेट के ठीक सामने बाथरूम का गेट हो तो यह नकारात्मक ऊर्जा देगा। इस दोष से बचने के लिए बाथरूम तथा रसोई के बीच में एक कपड़े का पर्दा या किसी अन्य प्रकार का पार्टीशन खड़ा कर सकते हैं ताकि रसोई से बाथरूम दिखाई न दे। 4- यदि घर के दरवाजे व खिड़कियां खुलने व बंद होने पर आवाज करते हैं तो उनकी आवश्यक मरम्मत करवाएं। 5- आग्नेय कोण में रसोई न होने पर गैस चूल्हे को रसोई के आग्नेय कोण में रखकर दोष का निवारण कर सकते हैं। और यह भी नहीं सकते तो आग्नेय कोण में एक जीरो वाट का बल्ब जलाकर भी इस दोष से बचा जा सकता है। 6- यदि ईशान में बोरिंग या अण्डर ग्राउंड टैंक आदि न बनवा सके हों तो ईशान में एक सादा जल लगवा कर दोष का निवारण कर सकते हैं। 7- यदि भूखण्ड चौकोर नहीं हो तो यह अवश्य देख लें कि लंबाई, चौड़ाई की दुगुनी से अधिक न हो। यदि लंबाई, चौड़ाई से दुगुनी हो तो अतिरिक्त भूभाग पर स्वतंत्र इकाई का निर्माण करवाया जा सकता है।

घर में कोई दोष नही आ पाएगा।

ये हें वास्तु दोष निवारक सरलतम प्रयोग---- Posted by पंडित दयानन्द शास्त्री on December 2, 2011 at 9:11pmView Blog ये हें वास्तु दोष निवारक सरलतम प्रयोग---- वर्तमान में आम जनता के मन में वास्तु को लेकर अनेक गलत बातें/भ्रांतियां घर कर गयी हें वे इसे एक फालतू का ढकोसला मानते हे.. यदि बौद्धिकता से मनन करें तो आप पाऐंगे कि जहां उत्तर और पूर्वमुखी घर हैं, वहां दक्षिण और पष्चिम मुखी घर भी हैं। जहां भवन में उत्तरी-पूर्वी भाग में शौचालय बनें हैं, वहां वैसे ही भवन के अन्यत्र कोणांे में भी हंै। शुभत्व के जहां समस्त संसाधन गृह निर्माण आदि में लगाए गए हैं, वहां अनेक में इन सब से कोई भी शुभत्व का प्रयास नहीं किया गया है . .आदि.. आदि। यदि आप आंकड़े जमा करें तो पाऐंगे कि कहीं दक्षिण अथवा पष्चिम मुखी भवनों में निवास करने वाले तुलनात्मक रुप से अधिक फल-फूल रहे हैं। जिन भवनों में ईषान कोंण में शौचालाय बनें हैं वहां के लोग अन्यत्र कोंणो में बने शौचालयों की तुलना में अधिक स्वस्थ हैं अथवा अधिक संपन्न हैं। तो क्या हम उस वर्ग विषेष की बात मान कर स्वीकार कर लें कि वास्तुषास्त्र के अनुसार किए गए निर्माण आदि से सामान्यतया कोई अंतर नहीं पड़ता? आपके अपने व्यक्तिगत अनुभव में भी ऐसे प्रकरण अवष्य आए होंगे कि जहां भवन का निर्माण पूर्णतया शास्त्रोक्त उपायोें से किया गया है फिर भी उसके स्वामी अथवा उसके परिजन कष्ट भरा जीवन जी रहे हैं। जब आप वास्तु पंडित, ज्योतिष मनीषी, तांत्रिक, मांत्रिक आदि के पास गए होंगे तो उसने तत्काल गणना कर दी होगी और कह दिया होगा कि भवन का वास्तु तो बिल्कुल ठीक है परन्तु जनम पत्री में गृह नक्षत्रों का योग विपरीत बन कर कष्ट कारी सिद्ध हो रहा है अथवा किसी ने कुछ कर दिया है अथवा देखने में तो सब ठीक है परन्तु आपके पितर रुष्ट हैं..आदि..आदि। कहने का तात्पर्य यह है कि व्यक्ति का जीवन किसी एक घटक विषेष से प्रभावित नहीं हो रहा। अध्यात्म के मार्ग में जा कर, अंड-पिंड सिद्धांत को समझ कर, प्रारब्ध-पुरुषार्थ आदि की गूड़ता को मनन कर ही इस गूड़ रहस्य को समझा जा सकता है। प्रारब्ध के कर्मानुसार हम कष्ट भोग रहे हैं। लाख प्रयास, क्रम-उपक्रम करने पर भी हमेें आषातीत फल नहीं मिल पा रहे। किस प्रयास आदि से हमें लाभ मिल जाए यह दृष्ट नहीं है। इसलिए एक को गले न लगा कर मानव कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों को नियमित करते रहें, पता नहीं कौन सा उपक्रम आपको रास आ जाए। यदि आपको कहीं आभास हो कि सब कुछ होते हुए भी वास्तु अथवा अन्य किन्हीं दोषों के कारण आप कष्ट भोग रहे हैं तो निम्न सरलतम प्रयोग भी कर के देख लें, पता नहीं कौन सा प्रयोग आपके लिए फिट बैठ जाए। प्रयोग 1. मकान, दुकान अथवा अन्य कोई भवन निर्माण के समय अलग-अलग पूजा-अर्चना करना प्रचलित है। पूजा-पाठ का आप जो भी विधान अपना लें, थोड़ा है। आस्था हो तो यह प्रयोग करके देखें, घर में कोई दोष नही आ पाएगा। एक छोटा सा तंाबे का ढक्कन वाला लोटा लें, उसे धोकर चमका लें। लोटे में तंाबे के पांच छेद वाले सिक्के, छोटा सा चांदी का बना नाग और नागिन का जोड़ा, हनुमान जी के चरणों का थोड़ा सा सिन्दूर, लोहे का छोटा सा एक त्रिषूल तथा चांदी की एक जोड़ी पादुकाएं रख कर उसमें गंगा जल भर दें। लोटे का मुंह अच्छी तरह से बंद कर दें। जिससे जल छलक कर बाहर न गिरे। अब इसको घर, दुकान आदि की नींव में मुख्य द्वार के दांए भाग में दबा दें। यदि घर तैयार हो चुका हो और कोई सज्जन यह प्रयोग करना चाहें तो वह यह सामग्री मुख्य द्वार के दांयी ओर कहीं ऐसे पवित्र स्थान में दबा दें जहां से इसके दुबारा निकलने की संभावना न हो। यदि भवन के आस-पास उपयुक्त स्थान उपलब्ध हो तो वहाॅ अषोक, सिरस, केले, श्वेतार्क आदि के पेड़ लगा लें। पाठकों का भ्रम दूर कर दूॅ। जब तक वृक्ष की परछांई भवन पर नहीें पड़ती, वास्तु दोष नहीं लगता। घर के सामने घनी सी तुलसी की झाड़ लगा लें। यह सब उपक्रम घर में सकारात्मक ऊर्जा का समावेष करते हैं। प्रयोग 2. घर में सदैव श्री का वास रहे तथा वास्तु जनित किसी भी प्रकार के दोष के निदान के लिए घर की किसी लड़की, बहु, बेटी आदि से यह प्रयोग करवाएं। गुरुवार के दिन मुख्य द्वार के दाएं अथवा बांए ओर गंगा जल से पवित्र करें। यहाॅ दाएं हाथ की अनामिका तथा तथा हल्दी-दही के घोल से एक स्वास्तिक बनाएं। इस पर थोड़ा सा गुड़ रखकर एक बूंद शहद टपका दें। प्रत्येक गुरुवार को यह क्रम दोहरा दिया करें। कुछ समय बाद आपको घर का वातावरण सुखद लगने लगेगा। प्रयोग 3. किसी भी धातु का एक कटोरा लें। उसमें चावल, नागकेसर भर लें। यदि इनको किसी शुभ मुहूर्त में अभिमंत्रित करके भरा जाता है तो अधिक प्रभावषाली सिद्ध होगा। इस कटोरे में रखे चावलों में एक सिक्का, पीली बड़ी कौड़ी, पीली बड़ी हरड़ तथा छोटे से नृत्य करते हुए एक गणपति स्थापित कर दें। गणपति किसी भी धातु, काॅच, काष्ठ आदि के आप ले सकते हैं। सामग्री भरे हुए इस कटोरे को घर के किसी ईषान कोण में धरती से कुछ ऊॅचाई पर रख दें। भवन के वास्तु दोष निवारण में यह एक अचूक प्रयोग सिद्ध होगा। बहु-मंजिला भवन है अथवा भवन में अनेक कमरे हैं तो आप प्रत्येक तल तथा प्रत्येक कमरे के उत्तर-पूर्वी कोण में भी यह सामग्री रख सकते हैं। इसके लिए आपको उतनी संख्या में सामग्री भरे कटोरे तैयार करने होंगे जितने आप प्रयोग करने जा रहे हैं। प्रयोग 4. घर में सौभाग्य जगाने, प्रसन्न वातावरण बनाने अथवा भांति-भांति की सुगन्ध कर देवी-देवताओं को रिझाने के उपक्रम किए जाते हैं। अपनी-अपनी सामथ्र्य , श्रद्धानुसार लोग धूप, अगरबत्ती आदि का प्रयोग करते हैं। एक सलाह आपको अवष्य दूॅगा कि घटिया धूप, अगरबत्ती का प्रयोग अपने विवेक से ही करें। यह सड़े हुए मोबिल आॅयल से तैयार की जाती है। इससे वास्तु दोष दूर हो या न हो, देवी-देवता प्रसन्न हो अपनी कृपा दृष्टि आप पर तथा आपके भवन पर डालें या न डालें परन्तु यह निष्चित है कि आपके फैफड़े अवष्य खराब हो जाऐंगे। गाय के गोबर के दहकते हुए कण्डे पर शुद्ध घी में डुबोई लौंग, कपूर, गोला गिरि तथा बताषा अथवा चीनी डालकर धूनी करें। इस भीनी-भीनी मदमस्त महक से आपका चित्त प्रसन्न हो उठेगा। भवन के वातावरण में धीरे-धीरे सकारात्मक ऊर्जा भरने लगेगी। प्रयोग 5. किसी शुभ मुहूर्त में हल्दी से रंगे एक पीले कपड़े में थोड़ी सी नागकेसर, एक तांबे का सिक्का, हल्दी की एक अखण्डित गांठ, एक मुट्ठी नमक, एक पीली बड़ी हरड़, एक मुट्ठी गेंहू और चांदी अथवा तांबे की एक जोड़ा पादुकाएं बांधकर पोटली बना लें। इस पोटली को घर की रसोई में कहीं ऐसे स्थान पर लटका दें जहां आते-जाते किसी की दृष्टि उस पर न पड़े। जब लगे कि पोटली गन्दी होने लगी है तो किसी शुभ मुहूर्त में उपरोक्त सामग्री पीले कपड़े में बांधकर पुनः लटका दिया करें तथा पुरानी पोटली केा जल में कहीं विसर्जित कर दिया करें, आपके घर में सौभाग्य का आगमन होने लगेगा। प्रयोग 6. अपने दायें हाथ की आठ अंगुल प्रमाण में चार लोहे की कील ले लें। इतने ही बड़े चार टुकड़े बढ़ अथवा पीपल की जड़ के काट लें। इन्हें चारों कीलों के साथ अलग-अलग बांध लें। अपने भूखण्ड के चारों कोनों में इन्हेें दबा दें। घर को चारों तरफ से लोहे, तांबे तथा सामथ्र्य हो तो चांदी के तारों से इस प्रकार दबा दें, कि तार चारों ओर दबी हुई कीलों से स्पर्ष करते हुए रहें। भूखण्ड के जिस स्थान में ईषान कोंण आ रहा हो, वहाॅ तारों को अलग रखें। यहाॅ पीपल अथवा बढ़ के नौ पत्तों से, एक पत्ता बीच में रखकर अष्टदल कमल बनाएं। इस अष्टदल कमल की अपनी श्रद्धानुसार पूजा-अर्चना करें, इस पर कोई विग्रह, यंत्र अथवा अन्य कोई प्रतिष्ठित मूर्ती, चित्रादि रखकर चारों तरफ से ढक दें। जैसा भी निर्माण कार्य हो रहा हो, वह इसके बाद प्रारम्भ करवाएं। वास्तु निवारण का यह एक अचूक प्रयोग सिद्ध होगा। प्रयोग 7. पुष्य नक्षत्र में जड़ सहित चिरचिटे का एक पौधा उखाड़ लाएं। भवन में कहीं भी गड्ढा खोदकर इस पौधे को इस प्रकार से दबा दें कि पत्तियाॅ नीचे रहें और जड़ वाला भाग ऊपर। बद्नजर, किसी के कुछ करे-धरे का दुष्प्रभाव आदि में यह प्रयोग रामबांण सा सिद्ध होगा।

जानिए वास्तु दोष के कारण भी हो सकते हें तलाक..???

जानिए वास्तु दोष के कारण भी हो सकते हें तलाक..??? क्या आपका शयन कक्ष अग्नि कोण में है ???......... जानिए वास्तु दोष के कारण भी हो सकते हें तलाक..??? ---यदि पति -पत्नी का शयनकक्ष चोकोर हो तो उनके बीच हमेशा लड़ाई -झगडा होते रहता है ! ----यदि अगर शयनकक्ष का आग्नेय कोण ज्यादा हो ध्यान देने वाली बात हैं ! ES or SE का अलग अलग परभाव पड़ेगा ! ---- यदि अग्नि कोण पति -पत्नी इस कोण में सो जाएँ तो उनके बीच हमेशा लड़ाई -झगडा अक्सर होते रहेंगा ... ----यदि शयनकक्ष चोकोर हो तो उनके बीच हमेशा लड़ाई -झगडा अक्सर रहेंगा ---- ध्यान दीजिये... रसोई का स्थान कहा पर हैं ??इस का भी प्रभाव रहेंगा ! ल ---रसोईघर का स्थान अगर इस उर्जा (एनेर्जी) कोण पर हो तो तलाक का होना लगभग तय हैं..

वास्तु दोष करें दूर

वास्तु दोष करें दूर ND हमारे जीवन में वास्तु का महत्व बहुत ही आवश्यक है। इस विषय में ज्ञान अतिआवश्यक है। वास्तु दोष से व्यक्ति के जीवन में बहुत ही संकट आते हैं। ये समस्याएँ घर की सुख-शांति पर प्रभाव डालती हैं। आप निम्न व्यवसाय स्थल तथा निवास में परिवर्तन कर लाभ उठा सकते हैं। * शयन कक्ष में जूठे बर्तन रखने से घर की महिला के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है तथा परिवार में क्लेश भी होता है। * शयन कक्ष में पानी या भारी वस्तु न रखें। * शयन कक्ष में गंदे व्यसन करने से आपकी तरक्की में बाधा आएगी। * सीढ़ी के नीचे बैठकर कोई भी कार्य न करें। * किसी भी द्वार पर अवरोध नहीं होना चाहिए। * प्रवेश द्वार की ओर पैर करके सोना नहीं चाहिए। लक्ष्मी का अपमान होता है। * कोर्ट केस की फाइल मंदिर में रखने से मुकदमा जीतने में सहायता होती है। * स्वर्गवासी वृद्धों की तस्वीर हमेशा दक्षिण दिशा में ही लगाना चाहिए। घर में घड़ी के सेल पर विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि उसके धीरे होने से घड़ी भी धीरे चलेगी तो गृहस्वामी का भाग्य भी धीमे चलेगा। * पलंग कभी दीवार से मिलाकर न रखें। इससे पत्नी-पति में तकरार होती है। * किसी भी भवन का तीन राहों पर होना अशुभ होता है। इस दोष के लिए चारों दीवारों पर दर्पण होना चाहिए। * यदि कोई अधिक समय से बीमार है तो नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम का कोना) में सुलाना चाहिए। ईशान कोण में शीतल जल रखने से व्यक्ति बहुत ही जल्दी स्वस्थ होता है। * घर के मुख्य द्वार पर काले घोड़े की नाल, दुर्गा यंत्र, त्रिशक्ति, अंदर व बाहर की ओर गणपति अथवा दक्षिणमुखी द्वार पर हनुमानजी की तस्वीर अथवा भैरव यंत्र लगाकर लाभ लिया जा सकता है। इनको लगाने से ऊपरी हवा से बचा जा सकता है। * दवा हमेशा ईशान कोण में रखना चाहिए। दवा लेते
समय मुख भी इसी कोण में रखना चाहिए। इससे दवा शीघ्र असर करती है। इससे रोगी जल्दी ही स्वस्थ होता है। * यदि कोई भवन एस मोड़ पर है तो बहुत शुभ है।